YTMPodcast के एपिसोड 74 में तांत्रिक साधना से जुड़े साधक Deepak Joshi ने तंत्र, साधना, वशीकरण, कच्चा कलुआ, डेढ़ फुटिया और विभिन्न तांत्रिक परंपराओं से संबंधित अपने अनुभव साझा किए। यह ब्लॉग उन्हीं सूचनाओं का एक व्यवस्थित संकलन है। इसमें दर्शाई गई मान्यताएँ और जानकारी Deepak Joshi के निजी अनुभवों पर आधारित हैं।
बचपन से तांत्रिक साधना की शुरुआत
Deepak Joshi ने बताया कि तंत्र साधना में उनकी रुचि बचपन से ही विकसित हो गई थी। लगभग सात वर्ष की उम्र में वे अपने पिता के साथ धार्मिक और तांत्रिक विधियों को देखा करते थे। यह वातावरण धीरे-धीरे उन्हें उसी दिशा में खींचता चला गया। दस वर्ष की उम्र तक उन्हें गुरु मिल गए और पंद्रह वर्ष की आयु तक वे कई साधनाएँ स्वयं करने लगे थे। उनके अनुसार यह मार्ग उनके लिए कोई व्यवसाय नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रवृत्ति और जीवन का हिस्सा बन गया।
रक्त गुड्डा, लाल गुड्डा और रहस्यमयी तालाब
Deepak Joshi ने हरियाणा के एक ऐसे स्थान का वर्णन किया जहाँ कथाओं के अनुसार दुर्योधन युद्ध के बाद छिपा था। वहाँ एक तालाब है जिसका पानी लाल रंग का दिखाई देता है। उन्होंने इस स्थान पर की गई साधनाओं का उल्लेख किया, जिसमें “रक्त गुड्डा” या “लाल गुड्डा” की विधि शामिल है। उनके अनुसार यह एक विशेष तांत्रिक क्रिया है जिसकी जानकारी सीमित लोगों को ही होती है। उनके अनुसार यह पानी सामान्य हाथ में नहीं आता जब तक तांत्रिक प्रक्रिया न की जाए।
कच्चा कलुआ और डेढ़ फुटिया की अवधारणा
Deepak Joshi ने कच्चा कलुआ और डेढ़ फुटिया जैसे शब्दों का भी विस्तार से उल्लेख किया। उनके अनुसार:
कच्चा कलुआ
तंत्र साधना में उपयोग होने वाली एक शक्तिशाली इकाई मानी जाती है। कुछ मान्यताओं में इसे मृत बालक की आत्मा से जुड़ा बताया जाता है, जिसे विशेष तांत्रिक विधियों से जागृत किया जाता है। यह साधक के आदेश के अनुसार कार्य करती है, परंतु इसके लिए प्रतिदिन भोग और कार्य देना आवश्यक होता है।
डेढ़ फुटिया (Dedh Futiya)
Deepak Joshi के अनुसार यह भी एक प्रकार की तांत्रिक इकाई है, जो शव साधना और तामसिक अनुष्ठानों से सिद्ध की जाती है। यह ऊँचे स्तर की तांत्रिक क्रियाओं में उपयोग होती है। मान्यता है कि इसके गलत उपयोग से यह साधक को भी हानि पहुँचा सकती है।
यह सारी जानकारी केवल लोकविश्वासों, पारंपरिक तांत्रिक परंपराओं और Deepak Joshi के अनुभवों पर आधारित है।
श्मशान साधना और तांत्रिक विधियाँ
उनके अनुसार कई तांत्रिक विधियाँ श्मशान में ही पूरी होती हैं क्योंकि वहाँ की ऊर्जा सामान्य स्थानों की तुलना में अधिक तीव्र मानी जाती है। श्मशान में तंत्र-जागरण, यंत्र प्रयोग और मंत्र-साधना जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। वे बताते हैं कि श्मशान की लकड़ी बारिश में भी जलती है और यह स्थान साधना के लिए अनुकूल माना जाता है।
ब्लैक मैजिक और वशीकरण के दावे
Deepak Joshi के अनुसार आजकल अधिकांश लोग वशीकरण और ब्लैक मैजिक के नाम पर धोखा देते हैं। वास्तविक तांत्रिक विधियों के लिए नियम, समय और साधना की आवश्यकता होती है। वे वशीकरण को दो प्रकारों में विभाजित करते हैं:
- मन-मोहिनी वशीकरण – जिसे वे मन के स्तर पर आकर्षण बढ़ाने वाला बताते हैं।
- अनुष्ठान आधारित वशीकरण – जिसके लिए विशेष सामग्री, समय और मंत्रों का उपयोग होता है।
उनके अनुसार वास्तविक अनुष्ठानों की अवधि 11, 21, 41 या 51 दिन होती है। कुछ घंटों या एक–दो दिन में किया गया वशीकरण उनके अनुसार मात्र धोखा है।
Black Magic के मामलों के उदाहरण
Podcast में साझा किए गए उनके अनुभवों में से कई मामलों में परिवार, रिश्तेदारों या परिचितों द्वारा करवाई गई नकारात्मक ऊर्जाओं का उल्लेख है। कुछ उदाहरणों में उन्होंने बताया कि कैसे संपत्ति विवाद, संबंधों में तनाव और लोगों की निजी इच्छाओं के कारण तांत्रिक क्रियाओं का सहारा लिया गया।
एक मामले में उन्होंने अमेरिका में एक परिवार द्वारा झेली गई परेशानियों का उल्लेख किया, जिसमें उनके अनुसार एक आत्मिक इकाई लगातार परिवार को डराती थी और उन्हें अनुष्ठान कर इसे शांत करना पड़ा।
ये सारी कहानियाँ पूरी तरह Deepak Joshi के व्यक्तिगत अनुभव और मान्यताओं पर आधारित हैं।
जिन्नात और अन्य आत्मिक मान्यताएँ
कुछ मामलों में उन्होंने ऐसी घटनाओं का वर्णन किया जहाँ किसी अन्य धर्म से संबंधित तांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से जिन्नात जैसी संस्थाएँ भेजे जाने की बात कही गई। उनके अनुसार:
- जिन्नात किसी व्यक्ति पर मानसिक और शारीरिक प्रभाव डाल सकते हैं।
- यह व्यक्ति के निर्णय, स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
- तांत्रिक साधना से इन्हें नियंत्रित करने के प्रयास किए जा सकते हैं।
यह जानकारी भी पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है।
फर्जी तंत्र–मंत्र और सोशल मीडिया की सच्चाई
Deepak Joshi ने सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले चमत्कारों और तांत्रिक प्रयोगों को फर्जी बताया। उनके अनुसार:
- उड़ती हुई डोल (ड्रम)
- अचानक आग लग जाना
- लाइव तंत्र
- देवी आने का दिखावा
ये सब हाथ की सफाई और केमिकल ट्रिक्स से किए जाते हैं। वे बताते हैं कि वास्तविक साधना दिखावे के लिए नहीं होती और इसे कैमरे पर करने की अनुमति परंपराओं में नहीं है।
तंत्र-साधना में वेशभूषा का महत्व
Deepak Joshi हमेशा तांत्रिक वेशभूषा में दिखाई देते हैं, जिसमें हड्डियों की माला, रुद्राक्ष, और विशेष प्रकार के वस्त्र शामिल होते हैं। उनके अनुसार यह साधक का ड्रेस कोड होता है क्योंकि कई अनुष्ठानों में ऊर्जा रक्षा के लिए विशेष वस्त्र और आभूषण आवश्यक माने जाते हैं।
ऊर्जा, प्रवेश और शरीर पर प्रभाव
कुछ घटनाओं में उन्होंने बताया कि किस प्रकार आत्मिक इकाइयाँ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकती हैं और उसे मानसिक स्तर पर प्रभावित कर सकती हैं। उनके अनुसार:
- बाहरी रूप से दिखाई न देने पर भी व्यक्ति को आंतरिक असहजता महसूस हो सकती है
- नींद में अजीब अनुभव होना
- शरीर भारी लगना
- अनजानी बेचैनी
ये संकेत ऊर्जा-आधारित बाधाओं के रूप में देखे जाते हैं।
यह सब आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
सच्चाई और पाखंड के बीच अंतर
Deepak Joshi का मानना है कि आजकल तंत्र-मंत्र एक बाजार बन चुका है, जहाँ:
- कम दाम में बड़े वादे किए जाते हैं
- नकली वस्तुएँ बेची जाती हैं
- झूठे चमत्कार दिखाए जाते हैं
वे कहते हैं कि वास्तविक साधना में समय, सामग्री और अनुशासन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
निष्कर्ष
YTMPodcast Episode 74 में Deepak Joshi द्वारा साझा की गई बातें तांत्रिक परंपराओं, लोकविश्वासों और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित हैं। इसमें Dedh Futiya, Kaccha Kalua, Black Magic, वशीकरण, श्मशान साधना और आत्मिक ऊर्जा जैसे विषयों का विस्तार से उल्लेख किया गया।
यह ब्लॉग केवल उनकी मान्यताओं का संकलन है और किसी भी प्रकार के तांत्रिक अभ्यास का समर्थन नहीं करता।
यदि आप तंत्र-साधना, लोककथाओं और रहस्यमय परंपराओं में रुचि रखते हैं, तो यह एपिसोड इन्हीं विषयों पर एक अनोखी झलक प्रदान करता है।






